जय आदि-हेतु, जय जनक सबार
जय जय सङ्कीर्तनारम्भ अवतार
अनुवाद
"सबके आदि कारण और पिता की जय हो! संकीर्तन आंदोलन का शुभारंभ करने के लिए अवतरित हुए भगवान की जय हो!
"Victory to the Primordial Cause and Father of all! Victory to the Lord who descended to initiate the Sankirtana movement!
तात्पर्य
यद्यपि शास्त्रों में कीर्तन की विधि का उल्लेख है, किन्तु लोग एकान्तिक सेवाओं जैसे जप आदि की ओर अधिक आकर्षित थे। किन्तु कलियुग के मनुष्यों को उच्चतम वरदान देने हेतु श्री गौरसुंदर ने कीर्तन करने की अनिवार्यता का उद्घाटन किया।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥