श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 9: भगवान का इक्कीस घंटे का भावोन्माद और श्रीधर और अन्य भक्तों के लक्षणों का वर्णन  »  श्लोक 49
 
 
श्लोक  2.9.49 
চন্দনে করিযা লিপ্ত তুলসী-মঞ্জরী
পুনঃ পুনঃ দেন সবে চরণ-উপরি
चन्दने करिया लिप्त तुलसी-मञ्जरी
पुनः पुनः देन सबे चरण-उपरि
 
 
अनुवाद
भक्तों ने तुलसीदल को चंदन में डुबोया और बार-बार भगवान के चरण कमलों में अर्पित किया।
 
The devotees dipped the Tulsi leaves in sandalwood paste and offered them repeatedly at the Lord's lotus feet.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)