श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 9: भगवान का इक्कीस घंटे का भावोन्माद और श्रीधर और अन्य भक्तों के लक्षणों का वर्णन  »  श्लोक 48
 
 
श्लोक  2.9.48 
যজ্ঞ-সূত্র যথা-শক্তি বস্ত্র-অলঙ্কার
পূজিলেন করিযাষোডশ উপচার
यज्ञ-सूत्र यथा-शक्ति वस्त्र-अलङ्कार
पूजिलेन करियाषोडश उपचार
 
 
अनुवाद
अपनी क्षमता के अनुसार उन्होंने ब्राह्मणों को धागा, वस्त्र और आभूषण भेंट किए। इस प्रकार उन्होंने सोलह सामग्रियों से भगवान की पूजा की।
 
According to his ability, he offered thread, clothing, and jewelry to the brahmanas. Thus, he worshipped the Lord with sixteen items.
तात्पर्य
"षोडश उपचारा" अर्थात "पूजा की सोलह सामग्री" के अर्थ के लिए मध्य-खंड अध्याय छह, श्लोक 110 के सामग्री पर विचार करें।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)