श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 9: भगवान का इक्कीस घंटे का भावोन्माद और श्रीधर और अन्य भक्तों के लक्षणों का वर्णन  »  श्लोक 45
 
 
श्लोक  2.9.45 
ছত্র ধরিলেন শিরে নিত্যানন্দ রায
কোন ভাগ্যবন্ত রহিঽ চামর ঢুলায
छत्र धरिलेन शिरे नित्यानन्द राय
कोन भाग्यवन्त रहिऽ चामर ढुलाय
 
 
अनुवाद
भगवान नित्यानन्द ने भगवान के सिर पर छत्र धारण किया हुआ था और किसी भाग्यशाली आत्मा ने उन्हें चामर से पंखा झलाया।
 
Lord Nityananda held an umbrella over the Lord's head and some fortunate soul fanned Him with a chamara.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)