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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 9: भगवान का इक्कीस घंटे का भावोन्माद और श्रीधर और अन्य भक्तों के लक्षणों का वर्णन
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श्लोक 41
श्लोक
2.9.41
আপনে ঠাকুর তাঽর ভক্তি-যোগ দেখিঽ
ঽদুঃখীঽ-নাম ঘুচাইযা থূইলেন ঽসুখীঽ
आपने ठाकुर ताऽर भक्ति-योग देखिऽ
ऽदुःखीऽ-नाम घुचाइया थूइलेन ऽसुखीऽ
अनुवाद
उसकी भक्तिमय सेवा को देखकर, भगवान ने उसका नाम दुःखी से बदलकर सुखी कर दिया [दुःखी का अर्थ है “जो दुखी है,” और सुखी का अर्थ है “जो खुश है।]
Seeing his devotional service, the Lord changed his name from Dukhi to Sukhi [Dukhi means “one who is sad,” and Sukhi means “one who is happy.”]
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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