जय श्री-जगदानन्द-हरिदास-प्राण
जय वक्रेश्वर-पुण्डरीक-प्रेम-धाम
अनुवाद
जगदानंद और हरिदास के जीवन की जय हो! उन प्रभु की जय हो, जो वक्रेश्वर और पुण्डरीक के प्रेम के धाम हैं!
Glory to the life of Jagadananda and Haridasa! Glory to the Lord who is the abode of love of Vakresvara and Pundarika!
तात्पर्य
श्री गौरसुंदर वाक्रेस्वर और श्री पुंडलिक विद्यानिधी के प्रेम के आश्रय हैं; दूसरे शब्दों में, वाक्रेस्वर और पुंडलिक ने गौर हरि की शरण ली, जो सर्वोच्च आश्रय हैं।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥