श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 9: भगवान का इक्कीस घंटे का भावोन्माद और श्रीधर और अन्य भक्तों के लक्षणों का वर्णन  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  2.9.36 
দেবতা-সকলে ধরিঽ নরের আকৃতি
গুপ্তে অভিষেক করে, যে হয সুকৃতি
देवता-सकले धरिऽ नरेर आकृति
गुप्ते अभिषेक करे, ये हय सुकृति
 
 
अनुवाद
भाग्यशाली देवताओं ने मानव रूप धारण किया और गुप्त रूप से अभिषेक समारोह में भाग लिया।
 
The lucky deities assumed human form and secretly participated in the consecration ceremony.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)