श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 9: भगवान का इक्कीस घंटे का भावोन्माद और श्रीधर और अन्य भक्तों के लक्षणों का वर्णन  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  2.9.34 
বসিযা আছেন বৈকুণ্ঠের অধীশ্বর
ভক্ত-গণে জল ঢালে শিরের উপর
वसिया आछेन वैकुण्ठेर अधीश्वर
भक्त-गणे जल ढाले शिरेर उपर
 
 
अनुवाद
वैकुण्ठ के भगवान सिंहासन पर बैठे और सभी भक्तों ने उनके सिर पर जल डाला।
 
The Lord of Vaikuntha sat on the throne and all the devotees poured water on his head.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)