श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 9: भगवान का इक्कीस घंटे का भावोन्माद और श्रीधर और अन्य भक्तों के लक्षणों का वर्णन  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  2.9.32 
মুকুন্দাদি গায অভিষেক-সুমঙ্গল
কেহ কান্দে, কেহ নাচে, আনন্দে বিহ্বল
मुकुन्दादि गाय अभिषेक-सुमङ्गल
केह कान्दे, केह नाचे, आनन्दे विह्वल
 
 
अनुवाद
मुकुंद के नेतृत्व में भक्तों ने शुभ अभिषेक गीत गाए, जबकि कुछ भक्त रोए, कुछ नाचने लगे और कुछ परमानंद में डूब गए।
 
Led by Mukunda, the devotees sang auspicious Abhisheka songs, while some devotees cried, some danced and some were immersed in ecstasy.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)