श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 9: भगवान का इक्कीस घंटे का भावोन्माद और श्रीधर और अन्य भक्तों के लक्षणों का वर्णन  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  2.9.29 
সর্বাদ্যে শ্রী-নিত্যানন্দ ঽজয জযঽ বলিঽ
প্রভুর শ্রী-শিরে জল দিলা কুতুহলী
सर्वाद्ये श्री-नित्यानन्द ऽजय जयऽ बलिऽ
प्रभुर श्री-शिरे जल दिला कुतुहली
 
 
अनुवाद
सर्वप्रथम श्री नित्यानंद ने प्रसन्नतापूर्वक भगवान के सिर पर जल डालते हुए “जय! जय!” का जाप किया।
 
First of all, Sri Nityananda happily poured water on the Lord's head and chanted "Jai! Jai!"
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)