श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 9: भगवान का इक्कीस घंटे का भावोन्माद और श्रीधर और अन्य भक्तों के लक्षणों का वर्णन  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  2.9.28 
মহা-জয-জয-ধ্বনি শুনিঽ চারি ভিতে
অভিষেক-মন্ত্র সবে লাগিলা পডিতে
महा-जय-जय-ध्वनि शुनिऽ चारि भिते
अभिषेक-मन्त्र सबे लागिला पडिते
 
 
अनुवाद
जब सभी ने अभिषेक मंत्र पढ़ना शुरू किया तो चारों दिशाओं में “जय! जय!” की गूँजती ध्वनि सुनाई दी।
 
When everyone started reciting the Abhishek Mantra, the sound of "Jai! Jai!" echoed in all directions.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)