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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 9: भगवान का इक्कीस घंटे का भावोन्माद और श्रीधर और अन्य भक्तों के लक्षणों का वर्णन
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श्लोक 247
श्लोक
2.9.247
বৈষ্ণবের পাযে মোর এই নমস্কার
শ্রী-চৈতন্য-নিত্যানন্দ হৌক প্রাণ মোর
वैष्णवेर पाये मोर एइ नमस्कार
श्री-चैतन्य-नित्यानन्द हौक प्राण मोर
अनुवाद
मैं वैष्णवों के चरणों में सादर प्रणाम करता हूँ। श्री चैतन्य और नित्यानंद मेरे जीवन और आत्मा बनें।
I offer my respectful obeisances unto the feet of the Vaishnavas. May Sri Chaitanya and Nityananda be my life and soul.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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