श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 9: भगवान का इक्कीस घंटे का भावोन्माद और श्रीधर और अन्य भक्तों के लक्षणों का वर्णन  »  श्लोक 246
 
 
श्लोक  2.9.246 
অনিন্দুক হৈঽ যে সকৃত্ ঽকৃষ্ণঽ বলে
সত্য সত্য কৃষ্ণ তারে উদ্ধারিব হেলে
अनिन्दुक हैऽ ये सकृत् ऽकृष्णऽ बले
सत्य सत्य कृष्ण तारे उद्धारिब हेले
 
 
अनुवाद
जो कोई भी बिना किसी अपराध या निन्दा के उनके नामों का जप करता है, कृष्ण निश्चित रूप से उसका उद्धार करेंगे।
 
Whoever chants His names without any offense or blasphemy, Krishna will certainly deliver him.
तात्पर्य
यदि कोई अपराधमुक्त हो कर कृष्ण के पवित्र नामों का एक बार भी वैष्णव-अपराध, या सन्तों की निन्दा किए बिना जप करता है तो वह आसानी से कृष्ण की दया और सांसारिक अज्ञानता से मुक्ति प्राप्त कर लेगा। एक वैष्णव की सेवा किए बिना श्री गौर-नित्यानंद की सेवा में संलग्न होना किसी व्यक्ति के लिए असंभव है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)