প্রেম-ভক্তি হয প্রভু-চরণারবিন্দে
সেই কৃষ্ণ পায, যে বৈষ্ণব নাহি নিন্দে
प्रेम-भक्ति हय प्रभु-चरणारविन्दे
सेइ कृष्ण पाय, ये वैष्णव नाहि निन्दे
अनुवाद
जो व्यक्ति वैष्णवों की निन्दा नहीं करता, वह उनके चरणकमलों में प्रेम और भक्ति विकसित करके कृष्ण को प्राप्त करता है।
One who does not criticize the Vaishnavas attains Krishna by developing love and devotion at His lotus feet.
तात्पर्य
वैष्णव भक्त की निन्दा न करने वाला, जो वैष्णव को अपना गुरु मानता है, विष्णु भक्ति से विहीन तथा केवल नाम के गुरु कहलाने वाले तथाकथित गुरुओं से दूर रहता है, ऐसे तथाकथित गुरुओं के निन्दनीय कार्यों की प्रशंसा नहीं करता है तथा सम्पूर्ण विश्व को लाभ पहुंचाने की इच्छा रखते हुए ऐसे लोगों के कार्यों की महत्वहीनता का प्रचार करता है-ऐसा व्यक्ति श्री महाप्रभु के चरण-कमलों में शुद्ध भक्ति प्राप्त करता है, तथा गौर-नित्यानन्द की कृपा से वह श्री कृष्ण के चरण-कमलों को प्राप्त करता है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥