श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 9: भगवान का इक्कीस घंटे का भावोन्माद और श्रीधर और अन्य भक्तों के लक्षणों का वर्णन  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  2.9.24 
অভিষেক শুনিঽ প্রভু মস্তক ঢুলায
সবারে করেন কৃপা-দৃষ্টি অমাযায
अभिषेक शुनिऽ प्रभु मस्तक ढुलाय
सबारे करेन कृपा-दृष्टि अमायाय
 
 
अनुवाद
अभिषेक प्रार्थना सुनकर भगवान ने अपना सिर घुमाया और बिना किसी कपट के सभी पर दया दृष्टि डाली।
 
Hearing the Abhisheka prayer, the Lord turned His head and looked with compassion on everyone without any hypocrisy.
तात्पर्य
अभिषेक शुनि' वाक्यांश का अर्थ है "अभिषेक प्रार्थनाओं का पाठ सुनना।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)