श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 9: भगवान का इक्कीस घंटे का भावोन्माद और श्रीधर और अन्य भक्तों के लक्षणों का वर्णन  »  श्लोक 238
 
 
श्लोक  2.9.238 
বৈষ্ণব চিনিতে পারে কাহার শকতি
আছযে সকল সিদ্ধি, দেখযে দুর্গতি
वैष्णव चिनिते पारे काहार शकति
आछये सकल सिद्धि, देखये दुर्गति
 
 
अनुवाद
वैष्णव को पहचानने की क्षमता किसमें है? यद्यपि वैष्णव में सभी सिद्धियाँ होती हैं, फिर भी वह दुःखी प्रतीत होता है।
 
Who can recognize a Vaishnava? Although a Vaishnava possesses all the siddhis, he still appears to be unhappy.
तात्पर्य
संसार के ज्ञान में मतवाले मूढ़ पदार्थों को वैष्णव नहीं पहचान पाते। सब शक्तियाँ वैष्णव के वश में हैं पर वह उन शक्तियों के प्रति उदासीन रहता है। इसलिए मूढ़ों की दृष्टि में वह सर्वथा दु:खी और अभावग्रस्त है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)