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श्लोक 2.9.236  |
অহঙ্কার-দ্রোহ-মাত্র বিষযেতে আছে
অধঃপাত-ফল তার না জানযে পাছে |
अहङ्कार-द्रोह-मात्र विषयेते आछे
अधःपात-फल तार ना जानये पाछे |
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| अनुवाद |
| जो व्यक्ति झूठे अभिमान से भरा है और जीवन के लक्ष्य से ईर्ष्या करता है, वह अनिश्चित भविष्य की ओर गिरता है। |
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| A person who is full of false pride and jealous of the goal of life falls towards an uncertain future. |
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