श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 9: भगवान का इक्कीस घंटे का भावोन्माद और श्रीधर और अन्य भक्तों के लक्षणों का वर्णन  »  श्लोक 235
 
 
श्लोक  2.9.235 
কলা মূলা বেচিযাশ্রীধর পাইলা
যাহাকোটি-কল্পে কোটীশ্বর না দেখিবা তাহা
कला मूला वेचियाश्रीधर पाइला
याहाकोटि-कल्पे कोटीश्वर ना देखिबा ताहा
 
 
अनुवाद
भगवान ब्रह्मा लाखों कल्पों में भी वह नहीं देख पाएंगे जो श्रीधर ने केवल केले और केले के तने बेचकर प्राप्त किया था।
 
Lord Brahma would not be able to see even in millions of kalpas what Sridhar had achieved by selling only bananas and banana stems.
तात्पर्य
एक महा-युग 4,320,000 सूर्य वर्षों का होता है। ऐसे एक हजार महा-युगों को एक कल्प माना जाता है। श्रीधर, जो एक गरीब ब्राह्मण परिवार में जन्मा था और केवल केले और केले के तनों का व्यापार करता था, उसे वह प्राप्त हुआ जो भगवान ब्रह्मा, जो लाखों वैभवों के नियंत्रक हैं, लाखों ऐसे कल्पों में भी नहीं प्राप्त कर सकते।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)