श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 9: भगवान का इक्कीस घंटे का भावोन्माद और श्रीधर और अन्य भक्तों के लक्षणों का वर्णन  »  श्लोक 233
 
 
श्लोक  2.9.233 
ধন নাহি, জন নাহি, নাহিক পাণ্ডিত্য
কে চিনিবে এ সকল চৈতন্যের ভৃত্য
धन नाहि, जन नाहि, नाहिक पाण्डित्य
के चिनिबे ए सकल चैतन्येर भृत्य
 
 
अनुवाद
उनके पास न धन था, न अनुयायी, न शिक्षा। भगवान चैतन्य के ऐसे सेवकों को कौन पहचान सकता है?
 
They had no wealth, no followers, no education. Who could recognize such servants of Lord Chaitanya?
तात्पर्य
वैष्णवों के गुणों को भौतिक इंद्रियबोध या बाहरी लक्षणों से जान पाना नामुमकिन है। यह नहीं है कि जिसके पास अधिक धन है वह श्रेष्ठ वैष्णव है। यह नहीं है कि जिसके अधिक अनुयायी हैं वह श्रेष्ठ वैष्णव है। यह नहीं है कि जिसको शास्त्रों का अधिक ज्ञान है वह विष्णु का श्रेष्ठ भक्त है। हो सकता है कि भगवान चैतन्य के सेवकों के पास अधिक धन न हो, उनके अधिक अनुयायी न हों, और तर्क-वितर्क में कुशल होने की शैक्षणिक योग्यता न हो, लेकिन साधारण लोगों के पास यह समझने की योग्यता नहीं होती कि वे ऐसे मामलों के प्रति उदासीन क्यों होते हैं। भक्तगण श्री चैतन्य की सेवा को धन-दौलत, अनुयायियों और ज्ञान से बड़ा मानते हैं। इसलिए साधारण लोगों के लिए उनकी गरिमा, महिमा और महानता का अनुमान लगा पाना नामुमकिन है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)