श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 9: भगवान का इक्कीस घंटे का भावोन्माद और श्रीधर और अन्य भक्तों के लक्षणों का वर्णन  »  श्लोक 224
 
 
श्लोक  2.9.224 
যে ব্রাহ্মণ কাডিঽ নিল মোর খোলা পাত
সে ব্রাহ্মণ হৌক মোর জন্ম জন্ম নাথ
ये ब्राह्मण काडिऽ निल मोर खोला पात
से ब्राह्मण हौक मोर जन्म जन्म नाथ
 
 
अनुवाद
“वह ब्राह्मण जिसने मेरे केले के पत्ते बलपूर्वक छीन लिये, वह जन्म-जन्मान्तर तक मेरा प्रभु रहे।
 
“That Brahmin who forcibly snatched my banana leaves, may he be my lord for all my lives.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)