श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 9: भगवान का इक्कीस घंटे का भावोन्माद और श्रीधर और अन्य भक्तों के लक्षणों का वर्णन  »  श्लोक 223
 
 
श्लोक  2.9.223 
“মাগ মাগ” পুনঃ পুনঃ বলে বিশ্বম্ভর
শ্রীধর বলযে,—“প্রভু, দেহঽ এই বর
“माग माग” पुनः पुनः बले विश्वम्भर
श्रीधर बलये,—“प्रभु, देहऽ एइ वर
 
 
अनुवाद
विश्वम्भर ने बार-बार कहा, “मांगो, मांगो,” और श्रीधर ने उत्तर दिया, “हे प्रभु, मुझे यह वरदान दीजिए।
 
Vishvambhara repeatedly said, “Ask, ask,” and Sridhar replied, “O Lord, grant me this boon.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)