श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 9: भगवान का इक्कीस घंटे का भावोन्माद और श्रीधर और अन्य भक्तों के लक्षणों का वर्णन  »  श्लोक 216
 
 
श्लोक  2.9.216 
ভক্তি লাগিঽ সর্ব-স্থানে পরাভব
পাঞাজিনিযা বেডাও তুমি ভক্তি লুকাইযা
भक्ति लागिऽ सर्व-स्थाने पराभव
पाञाजिनिया वेडाओ तुमि भक्ति लुकाइया
 
 
अनुवाद
"तुम सदैव भक्ति से वशीभूत रहते हो। इसलिए तुमने भक्ति को छिपा लिया है और विजेता की तरह विचरण करते हो।"
 
"You are always overcome by devotion. Therefore, you have hidden devotion and move about like a conqueror."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)