श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 9: भगवान का इक्कीस घंटे का भावोन्माद और श्रीधर और अन्य भक्तों के लक्षणों का वर्णन  »  श्लोक 214
 
 
श्लोक  2.9.214 
অনন্ত ব্রহ্মাণ্ড-কোটি বহে যারে মনে
সে তুমি শ্রীদাম-গোপ বহিলা আপনে
अनन्त ब्रह्माण्ड-कोटि वहे यारे मने
से तुमि श्रीदाम-गोप वहिला आपने
 
 
अनुवाद
“आप जो असंख्य ब्रह्माण्डों के निवासियों के मन में विराजमान हैं, आपने स्वयं ग्वालबाल श्रीदामा को उठाया था।
 
“You who reside in the minds of the inhabitants of countless universes, You yourself raised the cowherd boy Sridama.
तात्पर्य
श्रीदामा की भक्ति भावना का वर्णन इस प्रकार मिलता है: एक बार भगवान कृष्ण ने अपने ग्वाला बाल सखाओं को बुलाया और एक नया खेल खेलने की अपनी इच्छा व्यक्त की। एक तरफ़ बलराम थे और दूसरी तरफ़ कृष्ण। खेल के दौरान, कुछ बालक वाहक थे और कुछ ढोए जा रहे थे। उस खेल में विजेताओं को हारने वालों के कंधों पर चढ़ना था। पराजित होने पर कृष्ण ने श्रीदामा को ढोया, भद्रसेन ने वृषभ को ढोया और प्रलंबासुर ने बलदेव को ढोया। (श्रीमद् भागवतम्, दशम स्कंध, अध्याय अठारह)
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)