श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 9: भगवान का इक्कीस घंटे का भावोन्माद और श्रीधर और अन्य भक्तों के लक्षणों का वर्णन  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  2.9.21 
কি অদ্ভুত সন্তোষের হৈল প্রকাশ
সবাই বাসেন যেন বৈকুণ্ঠ-বিলাস
कि अद्भुत सन्तोषेर हैल प्रकाश
सबाइ वासेन येन वैकुण्ठ-विलास
 
 
अनुवाद
उनकी संतुष्टि की भावनाएँ कितनी अद्भुत थीं! सभी को ऐसा लग रहा था मानो वे वैकुंठ में आनंद ले रहे हों।
 
How wonderful were their feelings of satisfaction! Everyone felt as if they were enjoying themselves in Vaikuntha.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)