श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 9: भगवान का इक्कीस घंटे का भावोन्माद और श्रीधर और अन्य भक्तों के लक्षणों का वर्णन  »  श्लोक 207
 
 
श्लोक  2.9.207 
তুমি ভক্তি, তুমি মুক্তি, তুমি অজ, ভব
তুমি বা হৈবে কেন, তোমারৈ যে সব
तुमि भक्ति, तुमि मुक्ति, तुमि अज, भव
तुमि वा हैबे केन, तोमारै ये सब
 
 
अनुवाद
"आप भक्ति हैं, आप मोक्ष हैं, आप ब्रह्मा और शिव हैं। लेकिन आपको वे क्यों मानते हैं? वे सभी आपके अधीन हैं।
 
"You are devotion, you are salvation, you are Brahma and Shiva. But why do they believe in you? They are all subordinate to you.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)