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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 9: भगवान का इक्कीस घंटे का भावोन्माद और श्रीधर और अन्य भक्तों के लक्षणों का वर्णन
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श्लोक 206
श्लोक
2.9.206
তুমি ইন্দ্র, তুমি চন্দ্র, তুমি অগ্নি, জল
তুমি সূর্য, তুমি বাযু, তুমি ধন, বল
तुमि इन्द्र, तुमि चन्द्र, तुमि अग्नि, जल
तुमि सूर्य, तुमि वायु, तुमि धन, बल
अनुवाद
"आप ही इंद्र हैं, आप ही चंद्र हैं, आप ही अग्नि और वरुण हैं। आप ही सूर्य हैं, आप ही वायु हैं, आप ही धन और बल हैं। आप ही यम, ...
"You are Indra, you are the moon, you are Agni and Varuna. You are the sun, you are the wind, you are wealth and strength. You are Yama,...
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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