श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 9: भगवान का इक्कीस घंटे का भावोन्माद और श्रीधर और अन्य भक्तों के लक्षणों का वर्णन  »  श्लोक 205
 
 
श्लोक  2.9.205 
তুমি সিদ্ধি, তুমি ঋদ্ধি, তুমি ভোগ, যোগ
তুমি শ্রদ্ধা, তুমি দযা, তুমি মোহ, লোভ
तुमि सिद्धि, तुमि ऋद्धि, तुमि भोग, योग
तुमि श्रद्धा, तुमि दया, तुमि मोह, लोभ
 
 
अनुवाद
"आप ही रहस्यपूर्ण सिद्धियाँ हैं, आप ही समृद्धि हैं, आप ही आनंद हैं, और आप ही योग हैं। आप ही श्रद्धा हैं, आप ही करुणा हैं, आप ही माया और लोभ हैं।
 
“You are the mysterious accomplishments, You are prosperity, You are bliss, and You are yoga. You are faith, You are compassion, You are illusion and greed.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)