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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 9: भगवान का इक्कीस घंटे का भावोन्माद और श्रीधर और अन्य भक्तों के लक्षणों का वर्णन
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श्लोक 201
श्लोक
2.9.201
জয জয অনন্ত-ব্রহ্মাণ্ড-কোটি-নাথ
জয জয শচী-পুণ্যবতী-গর্ভজাত
जय जय अनन्त-ब्रह्माण्ड-कोटि-नाथ
जय जय शची-पुण्यवती-गर्भजात
अनुवाद
"असंख्य ब्रह्माण्डों के स्वामी की जय हो! उनकी जय हो जो पुण्यमयी माता शची के गर्भ से उत्पन्न हुए हैं!
"Victory to the Lord of countless universes! Victory to Him who was born from the womb of the virtuous mother Sachi!
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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