श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 9: भगवान का इक्कीस घंटे का भावोन्माद और श्रीधर और अन्य भक्तों के लक्षणों का वर्णन  »  श्लोक 198
 
 
श्लोक  2.9.198 
কোন্ স্তুতি জানোঙ্ মুঞি কি মোর শকতি”
প্রভু বলে,—“তোর বাক্য-মাত্র মোর স্তুতি”
कोन् स्तुति जानोङ् मुञि कि मोर शकति”
प्रभु बले,—“तोर वाक्य-मात्र मोर स्तुति”
 
 
अनुवाद
“मेरे पास प्रार्थना करने की कोई क्षमता नहीं है।” तब प्रभु ने कहा, “केवल तुम्हारे शब्द ही मेरे लिए प्रार्थना हैं।”
 
“I have no ability to pray.” Then the Lord said, “Only your words are prayer for me.”
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)