श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 9: भगवान का इक्कीस घंटे का भावोन्माद और श्रीधर और अन्य भक्तों के लक्षणों का वर्णन  »  श्लोक 184
 
 
श्लोक  2.9.184 
প্রভু বলে,—“ভাল ভাল, আর নাহি দায”
শ্রীধরের খোলে প্রভু প্রত্যহ অন্ন খায
प्रभु बले,—“भाल भाल, आर नाहि दाय”
श्रीधरेर खोले प्रभु प्रत्यह अन्न खाय
 
 
अनुवाद
भगवान बोले, "अच्छा, अच्छा। अब मुझे कोई शिकायत नहीं है।" भगवान नियमित रूप से श्रीधर की पत्तलों से चावल खाते थे।
 
The Lord said, "Okay, okay. Now I have no complaints." The Lord regularly ate rice from Sridhar's plate.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)