श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 9: भगवान का इक्कीस घंटे का भावोन्माद और श्रीधर और अन्य भक्तों के लक्षणों का वर्णन  »  श्लोक 180
 
 
श्लोक  2.9.180 
কর্ণে হস্ত দেইঽ শ্রীধর ঽবিষ্ণু, বিষ্ণুঽ বলে
উদ্ধত দেখিযা তারে দেই পাত খোলে
कर्णे हस्त देइऽ श्रीधर ऽविष्णु, विष्णुऽ बले
उद्धत देखिया तारे देइ पात खोले
 
 
अनुवाद
तब श्रीधर ने अपने कानों को अपने हाथों से ढक लिया और कहा, "विष्णु! विष्णु!" भगवान को इतना अभिमानी देखकर, श्रीधर ने उन्हें पत्ते और तने दे दिए।
 
Then Sridhara covered his ears with his hands and said, "Vishnu! Vishnu!" Seeing the Lord so arrogant, Sridhara gave him the leaves and stems.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)