श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 9: भगवान का इक्कीस घंटे का भावोन्माद और श्रीधर और अन्य भक्तों के लक्षणों का वर्णन  »  श्लोक 178
 
 
श्लोक  2.9.178 
“প্রত্যহ গঙ্গারে দ্রব্য দেহ তঽ কিনিযা
আমারে বা কিছু দিলে মূল্যেতে ছাডিযা
“प्रत्यह गङ्गारे द्रव्य देह तऽ किनिया
आमारे वा किछु दिले मूल्येते छाडिया
 
 
अनुवाद
“आप वे सामग्री खरीदते हैं जो आप नियमित रूप से गंगा को अर्पित करते हैं, इसलिए यदि आप मुझे छूट देते हैं तो इसमें क्या गलत है?
 
“You buy the materials that you regularly offer to Ganga, so what is wrong if you give me a discount?
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)