शुक्ल यज्ञ-सूत्र, शोभे वेडियाशरीरे
सूक्ष्म-रूपे अनन्त ये-हेन कलेवरे
अनुवाद
अनंतदेव सूक्ष्म रूप में अपने शरीर को सुशोभित करने वाले श्वेत ब्राह्मण धागे में निवास करते थे।
Anantadeva resided in subtle form in the white Brahmin thread that adorned his body.
तात्पर्य
श्री अनंतदेव गौरा-नारायण की सेवा में निम्नलिखित दस भिन्न रूपों में रहते हैं: [1] छत्र [2] चरण पादुका [3] शय्या [4] तकिया [5] वस्त्र [6] आभूषण [7] आसन [8] गृह [9] यज्ञोपवीत [10] सिंहासन।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥