श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 9: भगवान का इक्कीस घंटे का भावोन्माद और श्रीधर और अन्य भक्तों के लक्षणों का वर्णन  »  श्लोक 168
 
 
श्लोक  2.9.168 
পরম-ব্রহ্মণ্য শ্রীধর ক্রূদ্ধ নাহি হয
বদন দেখিযা সর্ব-দ্রব্য কাডিঽ লয
परम-ब्रह्मण्य श्रीधर क्रूद्ध नाहि हय
वदन देखिया सर्व-द्रव्य काडिऽ लय
 
 
अनुवाद
परम ब्राह्मण श्रीधर क्रोधित नहीं हुए। भगवान का मुख देखकर उन्होंने उन्हें सारी वस्तुएँ दे दीं।
 
The supreme brahmin Sridhar did not become angry. Seeing the face of the Lord, he gave Him all the things.
तात्पर्य
श्रीधर के मुख पर कोई क्रोध के लक्षण न पाकर ब्राह्मणों द्वारा पूजे जाने वाले गौरसुन्दर ने श्रीधर का सारा धन ले लिया; या ब्राह्मणों द्वारा पूजे जाने वाले गौरसुन्दर के मोहक रूप से श्रीधर को क्रोध नहीं आया, यद्यपि गौरसुन्दर ने उनका धन जबरदस्ती ले लिया।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)