श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 9: भगवान का इक्कीस घंटे का भावोन्माद और श्रीधर और अन्य भक्तों के लक्षणों का वर्णन  »  श्लोक 155
 
 
श्लोक  2.9.155 
আথে-ব্যথে ভক্ত-গণ লৈলা তুলিযা
বিশ্বম্ভর আগে-নিল আলগ করিযা
आथे-व्यथे भक्त-गण लैला तुलिया
विश्वम्भर आगे-निल आलग करिया
 
 
अनुवाद
भक्तों ने उसे तुरन्त उठाया और सावधानीपूर्वक विश्वम्भर के सामने ले आये।
 
The devotees immediately picked him up and carefully brought him before Vishvambhar.
तात्पर्य
आलगा करिया मुहावरा का अर्थ है "बहुत हल्के से, बिना दबाव के।"
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)