श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 9: भगवान का इक्कीस घंटे का भावोन्माद और श्रीधर और अन्य भक्तों के लक्षणों का वर्णन  »  श्लोक 145
 
 
श्लोक  2.9.145 
এই-মত নবদ্বীপে আছে মহাশয
ঽখোলা-বেচাঽ জ্ঞান করিঽ কেহ না চিনয
एइ-मत नवद्वीपे आछे महाशय
ऽखोला-वेचाऽ ज्ञान करिऽ केह ना चिनय
 
 
अनुवाद
इस प्रकार वह नवद्वीप में रहने लगा। कोई उसे पहचानता नहीं था, क्योंकि सब उसे केवल केले के पत्ते बेचने वाला समझते थे।
 
Thus he began to live in Navadvipa. No one recognized him, as everyone thought he was just a banana leaf seller.
तात्पर्य
यह कोई नहीं समझ पाया कि केले के तने वाला विक्रेता श्रीधर भगवान चैतन्य के एक अविश्वसनीय भक्त है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)