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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 9: भगवान का इक्कीस घंटे का भावोन्माद और श्रीधर और अन्य भक्तों के लक्षणों का वर्णन
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श्लोक 143
श्लोक
2.9.143
মহা-সত্য-বাদী তেঙ্হো যেন যুধিষ্ঠির
যার যেই মূল্য বলে, না হয বাহির
महा-सत्य-वादी तेङ्हो येन युधिष्ठिर
यार येइ मूल्य बले, ना हय बाहिर
अनुवाद
वह महाराज युधिष्ठिर की तरह ही सत्यनिष्ठ थे। उन्होंने जो भी मूल्य तय किया, उससे कभी विचलित नहीं हुए।
He was as truthful as Maharaja Yudhishthira. He never deviated from whatever values he set.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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