श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 9: भगवान का इक्कीस घंटे का भावोन्माद और श्रीधर और अन्य भक्तों के लक्षणों का वर्णन  »  श्लोक 142
 
 
श्लोक  2.9.142 
অর্ধেক সওদায হয নিজ প্রাণ-রক্ষা
এই-মত হয বিষ্ণু-ভক্তের পরীক্ষা
अर्धेक सओदाय हय निज प्राण-रक्षा
एइ-मत हय विष्णु-भक्तेर परीक्षा
 
 
अनुवाद
बाकी आधे हिस्से से उसने अपना जीवन चलाया। यही विष्णुभक्त की परीक्षा है।
 
He supported himself with the other half. This is the test of a devotee of Vishnu.
तात्पर्य
शब्द 'साझेदारी' व्यवसाय से हुए लाभ को सन्दर्भित करता है। श्रीमद् भागवतम (10.88.8 और 8.22.24) में कहा गया है:

यस्यहं अनुगृह्णामि हरिष्ये तद-धनंशनैः

“यदि मैं किसी का विशेष रूप से अनुग्रह करता हूँ, तो मैं धीरे-धीरे उसे उसके धन से वंचित कर देता हूँ।”

ब्रह्मणं यम अनुगृह्नामि

तद-विशो विधुनोम्य अहं

यन-मदः पुरुषः स्थब्धो

लोकं माँ चावमन्यते

“प्रिय भगवान ब्रह्मा, भौतिक संपन्नता के कारण एक मूर्ख व्यक्ति बुद्धिहीन और पागल हो जाता है। इस प्रकार, उसके पास तीनों लोकों में किसी के लिए भी कोई सम्मान नहीं होता है और वह मेरे अधिकार को भी धता बताता है। ऐसे व्यक्ति का मैं यह особый अनुग्रह कर के पहले उसकी सारी संपत्ति छीन लेता हूँ।”

 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)