श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 9: भगवान का इक्कीस घंटे का भावोन्माद और श्रीधर और अन्य भक्तों के लक्षणों का वर्णन  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  2.9.14 
আবেশিত চিত্ত মহাপ্রভু গৌর-রায
পরম ঐশ্বর্য করিঽ চতুর্-দিগে চায
आवेशित चित्त महाप्रभु गौर-राय
परम ऐश्वर्य करिऽ चतुर्-दिगे चाय
 
 
अनुवाद
गौरांग महाप्रभु का हृदय परमानंद में लीन था। अपने परम ऐश्वर्य को प्रकट करते हुए, उन्होंने चारों दिशाओं में देखा।
 
Gauranga Mahaprabhu's heart was filled with ecstasy. Revealing His supreme opulence, He looked in all directions.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)