श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 9: भगवान का इक्कीस घंटे का भावोन्माद और श्रीधर और अन्य भक्तों के लक्षणों का वर्णन  »  श्लोक 136
 
 
श्लोक  2.9.136 
নিরবধি ভাবে মোরে বড দুঃখ পাঞা
আসিযা দেখুক মোরে ঝাট আন গিযা
निरवधि भावे मोरे बड दुःख पाञा
आसिया देखुक मोरे झाट आन गिया
 
 
अनुवाद
"जब वह निरन्तर मेरा चिन्तन करता है, तो उसे बड़ा दुःख होता है। उसे तुरन्त ले आओ ताकि वह मेरी महिमा देख सके।
 
"When he constantly thinks of me, he feels great sorrow. Bring him back immediately so that he may see my glory.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)