श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 9: भगवान का इक्कीस घंटे का भावोन्माद और श्रीधर और अन्य भक्तों के लक्षणों का वर्णन  »  श्लोक 130
 
 
श्लोक  2.9.130 
কি অদ্ভুত সুখ হৈল নিশার প্রবেশে
যে আইসে, সেই যেন বৈকুণ্ঠে প্রবেশে
कि अद्भुत सुख हैल निशार प्रवेशे
ये आइसे, सेइ येन वैकुण्ठे प्रवेशे
 
 
अनुवाद
रात होते ही कैसी अद्भुत खुशी छा गई! जो भी वहाँ आया, उसे ऐसा लगा जैसे वह वैकुंठ में प्रवेश कर गया हो।
 
As night fell, what a wonderful joy prevailed! Whoever came there felt as if they had entered Vaikuntha.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)