श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 9: भगवान का इक्कीस घंटे का भावोन्माद और श्रीधर और अन्य भक्तों के लक्षणों का वर्णन  »  श्लोक 129
 
 
श्लोक  2.9.129 
কেহ কাকু করে, কেহ করে জয-ধ্বনি
চতুর্দিগে আনন্দ-ক্রন্দন-মাত্র শুনি
केह काकु करे, केह करे जय-ध्वनि
चतुर्दिगे आनन्द-क्रन्दन-मात्र शुनि
 
 
अनुवाद
कोई नम्रता से बोल रहा था, कोई स्तुति कर रहा था। चारों दिशाओं में केवल हर्षोल्लास से भरे रुदन की ध्वनि सुनाई दे रही थी।
 
Some were speaking humbly, others were praising. In all directions, only the sound of joyful cries could be heard.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)