श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 9: भगवान का इक्कीस घंटे का भावोन्माद और श्रीधर और अन्य भक्तों के लक्षणों का वर्णन  »  श्लोक 128
 
 
श्लोक  2.9.128 
নানা-বিধ পুষ্প সবে পাদ-পদ্মে দিযা
ঽত্রাহি প্রভোঽ বলিঽ পডে দণ্ডবত্ হঞা
नाना-विध पुष्प सबे पाद-पद्मे दिया
ऽत्राहि प्रभोऽ बलिऽ पडे दण्डवत् हञा
 
 
अनुवाद
उन्होंने उनके चरण कमलों पर विभिन्न पुष्प अर्पित किये और फिर प्रणाम करते हुए कहा, “हे प्रभु, कृपया हमारी रक्षा करें।”
 
They offered various flowers at His lotus feet and then bowed down, saying, “O Lord, please protect us.”
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)