श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 9: भगवान का इक्कीस घंटे का भावोन्माद और श्रीधर और अन्य भक्तों के लक्षणों का वर्णन  »  श्लोक 127
 
 
श्लोक  2.9.127 
অমাযায বসিযা আছেন গৌরচন্দ্র
কিছু নাহি বলে, যত করে ভক্ত-বৃন্দ
अमायाय वसिया आछेन गौरचन्द्र
किछु नाहि बले, यत करे भक्त-वृन्द
 
 
अनुवाद
जब गौरचन्द्र अपनी पूर्ण महिमा में विराजमान थे, तब उन्होंने भक्तों की गतिविधियों के विषय में कुछ नहीं कहा।
 
When Gaurachandra was seated in his full glory, he did not say anything about the activities of the devotees.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)