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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 9: भगवान का इक्कीस घंटे का भावोन्माद और श्रीधर और अन्य भक्तों के लक्षणों का वर्णन
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श्लोक 126
श्लोक
2.9.126
শঙ্খ, ঘণ্টা, করতাল, মন্দিরা, মৃদঙ্গ
বাজাযেন বহু-বিধ, উঠে নানা রঙ্গ
शङ्ख, घण्टा, करताल, मन्दिरा, मृदङ्ग
बाजायेन बहु-विध, उठे नाना रङ्ग
अनुवाद
शंख, घंटियाँ, करतल, मृदंग और ढिंढोरों की ध्वनि से मनमोहक वातावरण उत्पन्न हो गया।
The sound of conch shells, bells, cymbals, drums and trumpets created a captivating atmosphere.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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