श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 9: भगवान का इक्कीस घंटे का भावोन्माद और श्रीधर और अन्य भक्तों के लक्षणों का वर्णन  »  श्लोक 122
 
 
श्लोक  2.9.122 
কোন প্রিযতম করে শ্রী-অঙ্গে ব্যজন
শ্রী-কেশ সṁস্কার করে অতি প্রিযতম
कोन प्रियतम करे श्री-अङ्गे व्यजन
श्री-केश सꣳस्कार करे अति प्रियतम
 
 
अनुवाद
उनके एक प्रिय भक्त ने उन्हें पंखा झला, जबकि एक अन्य प्रिय भक्त ने उनके बालों में कंघी की।
 
One of his beloved devotees fanned him, while another beloved devotee combed his hair.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)