श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 9: भगवान का इक्कीस घंटे का भावोन्माद और श्रीधर और अन्य भक्तों के लक्षणों का वर्णन  »  श्लोक 120
 
 
श्लोक  2.9.120 
শুনিযা মূর্ছিত গঙ্গাদাস গডিঽ যায
এই-মত কহে প্রভু অতি অমাযায
शुनिया मूर्छित गङ्गादास गडिऽ याय
एइ-मत कहे प्रभु अति अमायाय
 
 
अनुवाद
यह सुनकर गंगादास अचेत होकर भूमि पर गिर पड़े। इस प्रकार भगवान ने अपने भक्तों की सारी बातें सत्यतापूर्वक सुनाईं।
 
Hearing this, Ganga Das fell unconscious to the ground. Thus, the Lord revealed the truth of His devotees' words.
तात्पर्य
गंगादास पंडित कि पिछली गतिविधियों को वर्णन करते हुए जो कि सभी के लिए अज्ञात थीं, प्रभु ने कहा, "जैसे जब यवन राजा के उत्पीड़न से बचने के लिए गंगा के किनारे एक नाव न पाकर आप बड़े संकट में पड़े थे, उस समय मैंने एक नाविक का रूप धारण किया और आपको एक नाव में बिठाकर गंगा पार कराया। इसके बारे में आप के अलावा किसी को पता नहीं है। पर मुझे पता है।" यह सुनकर गंगादास जमीन पर लोटने लगे और उनकी चेतना चली गई। बद्ध जीव सभी ज्ञानता के गुण से रहित होते हैं। चूँकि सर्वोच्च प्रभु माया को नियंत्रित करते हैं, इसलिए उनके लिए कुछ भी अज्ञात या उनके ज्ञान से परे नहीं होता।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)