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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 9: भगवान का इक्कीस घंटे का भावोन्माद और श्रीधर और अन्य भक्तों के लक्षणों का वर्णन
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श्लोक 112
श्लोक
2.9.112
মোর আগে যবনে স্পর্শিবে পরিবার
গঙ্গা-প্রবিশিতে মন হৈল তোমার
मोर आगे यवने स्पर्शिबे परिवार
गङ्गा-प्रविशिते मन हैल तोमार
अनुवाद
“इस भय से कि यवन आपके परिवार के साथ दुर्व्यवहार करेंगे, आपने गंगा में प्रवेश करने का संकल्प लिया।
“Fearing that the Yavanas would ill-treat your family, you resolved to enter the Ganga.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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