श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 9: भगवान का इक्कीस घंटे का भावोन्माद और श्रीधर और अन्य भक्तों के लक्षणों का वर्णन  »  श्लोक 105
 
 
श्लोक  2.9.105 
কদাচিত্ যে ভক্ত না থাকে সেই-স্থানে
আজ্ঞা করিঽ প্রভু তারে আনান আপনে
कदाचित् ये भक्त ना थाके सेइ-स्थाने
आज्ञा करिऽ प्रभु तारे आनान आपने
 
 
अनुवाद
यदि संयोगवश कोई भक्त अनुपस्थित हो तो भगवान स्वयं आदेश देते थे कि उसे वहां लाया जाए।
 
If by chance any devotee was absent, the Lord himself would order that he be brought there.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)