श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 9: भगवान का इक्कीस घंटे का भावोन्माद और श्रीधर और अन्य भक्तों के लक्षणों का वर्णन  »  श्लोक 101
 
 
श्लोक  2.9.101 
অনুভব পাইয বিহ্বল শ্রীনিবাস
গডাগডি যায, কান্দে, বহে ঘন-শ্বাস
अनुभव पाइय विह्वल श्रीनिवास
गडागडि याय, कान्दे, बहे घन-श्वास
 
 
अनुवाद
भगवान के वचनों को समझकर श्रीवास भावविभोर हो गए। वे भूमि पर लोटने लगे, रोने लगे और गहरी साँस लेने लगे।
 
Srivasa was overwhelmed by the Lord's words. He rolled on the ground, weeping, and breathing deeply.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)